संस्कृत विद्वान् • हिन्दी काव्यकार • धर्मग्रन्थ अनुवादक
पं. गोविन्द मकरन्द दुबे जी संस्कृत और हिन्दी के प्रकाण्ड विद्वान् हैं। वे अपना सम्पूर्ण जीवन प्राचीन संस्कृत धर्मग्रन्थों का अध्ययन करने और उन्हें सरल हिन्दी में अनुवादित करने में समर्पित कर रहे हैं।
उनका मानना है कि वेद, पुराण, गीता और रामायण जैसे महान ग्रन्थों में निहित ज्ञान केवल संस्कृत जानने वालों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। इन ग्रन्थों का सार और संदेश प्रत्येक भारतीय, विशेषकर सामान्य जनमानस तक सरल भाषा में पहुँचना चाहिए।
इसी उद्देश्य से उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता, भागवत पुराण और रामायण का हिन्दी छन्दों में अनुवाद किया है। उनके अनुवाद की विशेषता यह है कि उन्होंने मूल संस्कृत श्लोकों का भाव पूर्णतः अक्षुण्ण रखते हुए हिन्दी में काव्यात्मक सुन्दरता का समावेश किया है।
"धर्मग्रन्थों का सच्चा उद्देश्य मानव जीवन को उन्नत बनाना है। यह तभी सम्भव है जब ये ग्रन्थ सरल भाषा में सभी को उपलब्ध हों। संस्कृत हमारी धरोहर है, परन्तु हिन्दी हमारी जीवन्त भाषा। दोनों का सुन्दर संगम ही धर्म के प्रसार का माध्यम बन सकता है।"
श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों का सरल हिन्दी छन्दों में अनुवाद, जिसमें मूल संस्कृत श्लोकों के साथ भावानुवाद प्रस्तुत किया गया है।
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पढ़ें →महर्षि वाल्मीकि रचित आदिकाव्य रामायण का हिन्दी अनुवाद, जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की महागाथा प्रस्तुत करता है।
पढ़ें →आवश्यक वस्तु मैन्युअल के 13 संस्करणों का प्रकाशन — विधि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान
संस्कृत श्लोकों का हिन्दी छन्दों में सुन्दर रूपान्तरण
गूढ़ दार्शनिक विषयों को सामान्य जन के लिए सुबोध बनाना
सरकारी सेवा और सनातन धर्म के ज्ञान का प्रसार
जबलपुर, मध्य प्रदेश
पाथेय प्रकाशन धार्मिक और सांस्कृतिक ग्रन्थों के प्रकाशन में विशेष रुचि रखता है। पं. गोविन्द मकरन्द दुबे जी की कृतियाँ इसी प्रकाशन से उपलब्ध हैं।
पं. गोविन्द मकरन्द दुबे जी द्वारा किया गया कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है। उनके अनुवादित ग्रन्थ लाखों पाठकों को धर्म, ज्ञान और जीवन के मार्ग पर प्रेरित कर रहे हैं।
उनका यह कार्य केवल साहित्यिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सनातन धर्म की सेवा है, जो भारतीय संस्कृति को जीवन्त रखने में सहायक है।
पं. गोविन्द मकरन्द दुबे जी द्वारा अनुवादित धार्मिक ग्रन्थ पढ़ें
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